LoC के पास लैंडमाइन ब्लास्ट: 6 जवान घायल, पेट्रोलिंग के दौरान हुआ हादसा
म्मू-कश्मीर के राजौरी जिले के भवानी सेक्टर में मंगलवार सुबह एक लैंडमाइन विस्फोट में भारतीय सेना की गोरखा राइफल्स के 6 जवान घायल हो गए। यह हादसा मकरी इलाके में सुबह करीब 10:45 बजे हुआ, जब जवानों की एक टुकड़ी खंबा किले के पास पेट्रोलिंग कर रही थी।
कैसे हुआ हादसा
पेट्रोलिंग के दौरान एक जवान का पैर गलती से सेना द्वारा पहले से बिछाई गई बारूदी सुरंग पर पड़ गया, जिससे विस्फोट हो गया। घायल जवानों को तुरंत इलाज के लिए राजौरी के 150 जनरल अस्पताल (GH) ले जाया गया। अधिकारियों के अनुसार, सभी जवानों को मामूली चोटें आई हैं, और उनकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है।
घायलों के नाम
हादसे में घायल जवानों की पहचान निम्न प्रकार से हुई है:
- हवलदार एम गुरुंग (41)
- हवलदार जे थप्पा (41)
- हवलदार जंग बहादुर राणा (41)
- हवलदार आर राणा (38)
- हवलदार पी बद्र राणा (39)
- हवलदार वी गुरुंग (38)
लैंडमाइन क्यों बिछाई जाती हैं?
भारतीय सेना LoC (लाइन ऑफ कंट्रोल) पर घुसपैठ रोकने के लिए बारूदी सुरंगें बिछाती है। सेना के अधिकारियों का कहना है कि ये सुरंगें दुश्मन के घुसपैठियों को रोकने में मदद करती हैं। हालांकि, कभी-कभी प्राकृतिक कारणों से ये लैंडमाइन अपनी जगह से हट जाती हैं, जिससे ऐसी घटनाएं हो सकती हैं।
2024 में भी हुईं थीं ऐसी घटनाएं
यह पहली बार नहीं है कि लैंडमाइन विस्फोट की घटना सामने आई हो। 2024 में भी ऐसी दो घटनाएं हुई थीं:
- 9 दिसंबर 2024: जम्मू के पुंछ जिले में थानेदार टेकरी इलाके में एक बारूदी सुरंग विस्फोट में हवलदार वी. सुब्बैया वरिकुंटा शहीद हो गए थे।
- अक्टूबर 2024: कुपवाड़ा जिले में तड़के 3 बजे एक खदान विस्फोट हुआ था, जिसमें सेना के 2 जवान घायल हुए थे। यह हादसा भी पेट्रोलिंग के दौरान हुआ था।
नक्सली इलाकों में भी बारूदी सुरंग का खतरा
जम्मू-कश्मीर के अलावा, छत्तीसगढ़ जैसे नक्सल प्रभावित इलाकों में भी लैंडमाइन विस्फोट की घटनाएं होती रहती हैं। नक्सली बारूदी सुरंग का उपयोग सुरक्षाबलों को नुकसान पहुंचाने के लिए करते हैं। 2024 में ही एक घटना में 8 जवान शहीद हो गए थे।
सावधानी बरतने की जरूरत
ऐसी घटनाओं से बचने के लिए सेना को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। अधिकारियों के मुताबिक, बारूदी सुरंगों की नियमित जांच और उनकी स्थिति पर निगरानी बढ़ाने से इस तरह की घटनाओं को कम किया जा सकता है।
निष्कर्ष
राजौरी की यह घटना न केवल सुरक्षा बलों के लिए एक चेतावनी है, बल्कि घुसपैठ को रोकने की रणनीति पर भी विचार करने की जरूरत को रेखांकित करती है। घायल जवानों की स्थिति स्थिर है, लेकिन ऐसी घटनाओं से सबक लेकर सुरक्षाबलों को भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से बचाने की दिशा में कदम उठाने चाहिए।
नक्सली इलाकों में बारूदी सुरंग का खतरा: सतर्कता जरूरी
जम्मू-कश्मीर के अलावा, छत्तीसगढ़ जैसे नक्सल प्रभावित इलाकों में बारूदी सुरंग का खतरा लगातार बना रहता है। नक्सली अपने मंसूबों को पूरा करने के लिए लैंडमाइन का उपयोग करते हैं, जिससे सुरक्षाबलों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। 2024 में एक बड़ी घटना में 8 जवान शहीद हो गए थे, जिसने इन इलाकों में बारूदी सुरंगों के खतरों को और अधिक उजागर कर दिया।
ऐसी घटनाओं से निपटने और जवानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सेना और प्रशासन को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है। अधिकारियों का कहना है कि बारूदी सुरंगों की समय-समय पर जांच और उनकी स्थिति पर निरंतर निगरानी रखी जानी चाहिए। इसके लिए आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल और खुफिया जानकारी साझा करना बेहद जरूरी है।
सुरक्षाबलों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए, इलाके की गहन जांच, सटीक योजनाबद्ध ऑपरेशन, और नियमित प्रशिक्षण पर जोर दिया जा रहा है। बारूदी सुरंगों का खतरा केवल सेना के लिए ही नहीं, बल्कि आम नागरिकों के लिए भी खतरा है। ऐसे में सभी स्तरों पर सतर्कता बरतना आवश्यक है।
सरकार और सुरक्षा एजेंसियां मिलकर इन घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठा रही हैं, लेकिन इस चुनौती से निपटने के लिए सामूहिक प्रयासों की जरूरत है।
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